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अप्रैल, 2008 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

किन्नरों का दर्द

समाज में तरह-तरह से लोगों की भूमिका तय की जाती है, या दूसरे शब्दों में यूं कहें कि तय हो जाती है । इसमें सबसे बड़ा आधार बनता है लिंग यानि मर्द-औरत का विभाजन । लेकिन उनका क्या जो इस श्रेणी में आते ही नहीं । सच पूछिए तो समाज ने किन्नरों की भूमिका तय करने में कभी खास दिलचस्पी ली ही नहीं । इसलिए जीने-खाने के लिए उनसे जो बन पड़ा उन्होंने किया, हर किसी की खुशियों में शामिल होना...आशीष देना...उनकी सलामती की दुआ मांगना । और बदले में बख्शिश लेना । यहीं कुछ थोड़े से काम है जो किन्नरों के जिम्मे कर दी गई है । लेकिन बदलते समय में उनकी भूमिका भी बदलने लगी है । कभी तारणहार के किरदार में...तो कभी बेसहारा..मजलूमों के मसीहा के रोल में....लोगों के लिए खुशी का मौका हो या फिर गम का । किन्नरों ने सबके लिए समय निकाला...लेकिन उनके दुख-दर्द को जाना और समझा तो उनके ही अपने एक किन्नर ने...बाकी दुनिया ने उनकी तरफ देखना भी मुनासिब नहीं समझा । कह सकते हैं कि किन्नरों की कथा उनसे शुरू होती है, और उनपर ही खत्म होती है। किन्नर...एक लफ्ज भर नहीं...किसी की पहचान है...शक्ल सूरत मर्दों की लेकिन व्यवहार से लेकर ...

छोटे अखबारों की भूमिका

इलेक्ट्रानिक मीडिया के जमाने में भी जनसंचार के रुप में अखबारों की भूमिका निर्विवाद रुप से स्थापित है। अखबारों ने न सिर्फ देश के सुदूर इलाकों में अपनी पहुंच बनाई है, बल्कि इन इलाकों में ये विकास की प्रक्रिया में उत्प्रेरक भी सिद्ध हुए हैं। पर जब बात इन अखबारों के सामाजिक सरोकार की आती है, तो बाजार का दबाव इलेक्ट्रोनिक मीडिया की ही तरह यहां भी साफ दिखता है। जाहिर है फिल्म,क्रिकेट,सेर्लिब्रेटी और सेक्स की खबरें हावी हो जाता है। टीवी न्यूज़ के प्राइम टाइम और बड़े अखबारों के मुख्यपृष्टों में इन्हें ज़्यादा तरजीह मिल जाती है , तो अब किसी को हैरानी नहीं होती । रानी मुखर्जी के शिड्डी में जमीन खरीद में हुई ठगी को सभी सुर्खी बना लेते हैं। युवराज सिंह के छे गेंदों पर छे छक्कों से मीडिया ऐसा माहौल बना देता है कि मानो देश की सभी समस्याएं ही खत्म हो गई । लेकिन कर्ज के बोझ तले विदर्भ , आंध्रप्रदेश में किसानों की खुदकुशी , महिलाओं , बच्चों के खिलाफ होने वाले अत्याचार , सरकार और समाज में लोगों की हिस्सेदारी और अधिकार जैसे विषयों को कभी उतना स्पेस और वक्त नहीं दिया जाता है। जाहिर है जो खबरें बिकेगी... व...